ज़ख्मो की पीर

ज़ख्मो की ये पीर

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अब अच्छी लगती है

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अश्क़ों की खीचीं लकीर

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अब सच्ची लगती है

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कोई कुरेद दे तो

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मजा दुगुना हो जाता है

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दर्द की ये तासीर

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अब अच्छी लगती है

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#मन

#yeh_jindagi

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कुछ चेहरे नजर आ ही जाते हैं

छोटी सा शहर है अपना उदयपुर

कुछ चेहरे नजर आ ही जाते हैं

कुछ  में हम खो जाते हैं

कुछ हमको भा ही जाते हैं

मगर दिल अब दीदार चाहता नहीं

तुमसे अब पहले सा राबता नहीं

उस उम्र में थोड़ी नासमझी थी

बचपना ही था जो तेरा इन्तेजार करता था

अब हर उस जगह से दूर भागता हूँ

जहाँ तेरे दीद की उम्मीद हो

मगर छोटा सा शहर है अपना उदयपुर

कुछ चेहरे नजर आ ही जाते हैं

कितना ही बांधू अश्क़ों का समन्दर

तनहा रातों में लब सिसक ही जाते हैं
याद है वो दिन

जब हम मिले थे

पिछोला के जोलो में

अम्बराई के हिचकोलों में

अपना इजहारे इश्क़ हुआ

सुखाड़िया की राहों में

सज्जनगढ़ की पनाहों में

मुकम्मल फिर इश्क़ हुआ

हर लम्हा गुलजार था

पर अब मौसम बीत गया

तेरे आने की उम्मीद नहीं

ना तुझे पाने का अरमान

मगर छोटा सा शहर है अपना उदयपुर

कुछ चेहरे नजर आ ही जाते हैं
इश्क़ मुकम्मल होकर भी

मुकम्मल हो ना सका

खुद को खोकर भी

तुझको पा ना सका

फरेब था तेरे इमान में

ये अब समझ में आया है

तुझे भूलकर जानम

आज खुद को फिर पाया है

पहले रोया बहुत

फिर खुद को ही मनाया

ना माना मन पर बार बार समझाया

अच्छा ही हुआ जो तू बेवफा निकली

तेरे बाद सनम खुद पर लूट जाने को वफ़ा मचली

मगर फिर छोटा सा शहर है अपना उदयपुर

कुछ चेहरे नजर आ ही जाते हैं

कभी जो ख़त्म हो चुके थे सिलसिले

संकरी सी गलियों में कहीं

फिर गुल खिल ही जाते हैं

अपना सा शहर है अपना उदयपुर

दिल कितने भी टूटें

फिर दिल मिल ही जाते हैं
#मन©

#yeh_jindagi

प्रेम पत्र

कुछ रंग तेरे भी

कुछ रंग मेरे भी

मैंने चुना वो स्याह रंग

प्रेमपत्र के लिबास में

तूने बुना जो लाल रंग

रंग ऐ हिना के मिजाज में

तेरा रंग सुर्ख है मगर

वक्त ढलते छूट जाएगा

मेरे लफ़्ज खामोश हैं मगर

देर तक गूंजते रहेंगे

तेरी बेवफाई के किस्से

किताबों में शुमार करेंगे

#मन

#yeh_jindagi

यूँ ही….

कभी-कभी बस यूँ ही

बातों बातों में

जब तुम कह देती हो

कुछ नश्तर सा

सोचती नहीं

देखती नहीं

कितना टूट जाएगा मन

काँच के टुकड़ों सा बिखर जाएगा

मगर फिर भी मन टूटता नहीं

नाराज भले हो जाऊँ मगर रूठता नहीं

काँच के टुकड़े कहीं तुमको ना चुभे

इस परवाह में मन टूटता नहीं

#मन

#yeh_jindagi

#यूँ_ही

प्रेम की प्रकृति

बून्द जो गिरी कोरे कोरे मन पे तो

देख यह बात बदली मुस्कुरा गई

अधूरी सी चाहते, प्यासी सी तरंग थी जो,

पाई स्वाति बून्द जो, पत्तियों की पोरो पर वो भी भरमा गई

,

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कारी कारी बदली थी, घन घनश्याम जैसे

पुष्प पे गिरी तो फिर पंखुड़ी की धार शरमा गई

,

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देख के चकोर मन, चाँद और चाँदनी भी

बादलों की ओट पाके, मोर मन अग्नि भी और गरमा गई
#मन

#yeh_jindagi

नकली लोग

वफ़ा करते हैं #नकली सी

असली इनके दावे हैं

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ये चेहरे हैं झूठ के सारे

झूठे इनके पहनावे हैं

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दवा करते हैं नकली सी

#असली इनके कारनामे हैं

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ये चेहरे हैं झूठ के सारे

झूठे इनके पहनावे हैं

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मनगढ़ंत हैं किस्से इनके

करते झूठे दिखावे हैं

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ये चेहरे हैं झूठ के सारे

झूठे इनके पहनावे हैं

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मन

#yeh_jindagi

जाने भी दो…

दर्द जब हद से बढ़ जाये

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कुछ बूँदो को फिर

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बह #जाने_भी_दो

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ख्वाबों का समन्दर है

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कुछ ख्वाब गर आँखों में ही रह जाये

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तो रह #जाने_भी_दो

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दिल चिर रही हैं ये चुप्पियाँ

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कुछ तुम कहो, कुछ हमें

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कह #जाने_भी_दो 

•मन•

#yeh_jindagi